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‘Shree Ram Charit Manas’ is an excellent epic written in typical Devanagari, Awadhi Language by a 16th Century Saint and Ram Devotee, ‘Shree Tulsidas ji’ (1532 – 1623). You can view the short life journey of Shree Tulsidas Maharaj: 

Video Link – https://youtu.be/-9NQojb4DHc

What is Shree Ram Charit Manas?

Shree Ram Charit Manas is a Lake of Deed of Shree Rama Bhagwan which is beautifully collected and compiled in form of Shri Ram Charit Manas.

What is Shri Ram Charit Manas ‘s Shalaka Prashnavali?

Shri Ram Shalaka Pranshnavali is not uncommon among the group of Rama Devotee or Vaishnav Sampraday. 

The utility and importance of Shree Ram Charit Manas and Ram Prashnavali ( Questionnaires ) are extremely high in the mind of Vaishnava Devotees.

Hence, to get a clear picture of this Prashnavali which seems to be like a ready reckoner and ‘Instant prashna kundali’ like ‘Falnama’ wherein I have stated many Islamic Falanama like Tam Tam Falnama, Ruhi Falnama,  Hakim Lukmani Falnama, to name a few where you need to get the divine answers to your unresolved questions of your life.

Like Islamic Falanama, Hindu Sanatan Dharma consists of many such Ready Reckoners like Hanuman Jyotish, Prashna Kundali in Indian Astrology. So, among them “Shree Ram Shalaka Prashnavali” is said to be the top one among those methods.

Below is the chart of Shree Ram Charit Manas’s – Ram Prashnavali.

How to Use Shree Ram Charit Manas Shri Ram Prashnavali

The procedure to get an instant answer through this Shree Ram Charit Manas Shri Ram Prashnavali  is:

  1. Take a bath and wear clean and fresh clothes.
  2. Sit down on an Asana(mat), facing either East or North Direction.
  3. Close your eyes and pray to Lord Shri Rama.
  4. While chanting /praying, put your Middle or Index finger on the given chart (any part of the chart).
  5. One may also keep the pen holding in hand and put the pen or stick it on the given chart while offering prayers to Lord Shri Rama.
  6. Write the letter which is on blank paper. 
  7. The poster of the questionnaire should be marked with a mark so that neither the questionnaire is spoiled nor the question is forgotten in the bracket on receiving the answer, then the letter of the vegetable bracket is written in it and it should be moved in the bracket which is often on its naval bracket. 
  8. Person should also write it down. In this way, the ninth krama ( series ) of 9 characters should be written and continue writing till it reaches the finger or the advice of the first parenthesis or first alphabet.
  9. The letter of the first bracket will be in the new bracket of the letter of the parenthesis, by reaching there, a whole square will be completed. 
  10. It is natural for two letters to be present in a quantity and a parenthesis, so when counting, neither the parenthesis of the quantity should be omitted nor the two-letter bracket should fall twice where the parenthesis of the quantity should be written in front of the preceding letter. 
  11. And where the two-letter brackets should be, they should often be written together.
  12. Now in the form of a complete prashnavali, a Ramshalaka questionnaire leaves a square in response to a question. 
  13. The reader should look carefully at someone while meditating on Lord Sri Ramachandra Ji and chanting his question. The finger reaches in the parenthesis and if it is written by counting the letters according to the sequence mentioned above, then the answer will be made as a square.
  14. Chaupai – Ho e hi so i jo ra ma * ra chi ra kha. 
  15. This Chaupai falls under the dialogue of Shiva and Parvati under Balakand. The person desirous of asking this answer should take shelter out of the form that the work is in doubt, so it would be good to leave it to God.
  16. In addition to this quote, Shri Ram Shalaka 8 of the questionnaires are made and the location of all of them and their result is given below with details.

1 – Sunu Siya Satya Asis, our worshipped mind wishes you. 

Chapter – Chaupai is in the context of Gauri worship of Sita Ji in Bal Kand. Gauri Ji has blessed Sita Ji. 

Reading – the question of the questioner is good, this work will be proved. 

2 – Prabhashi Nagar Kije Sab Kaja I Hadeye rakhi Kolhapur raja ॥

Chapter – This chaupai is to enter Hanuman ji in Sunderkand. 

Reading – Start the work by remembering the fruit – Bhagavan – success will surely be found. 

3 – Udharhi ant an Houi Nibaahu I Kaal Nemi Jimi Ravan Rahuasthan II 

Chapter – This is in the context of a Satsang at the beginning of the chaupai bal kand. 

4 – Bidhi Bus Sujan Kusangat Par hi I Phani mani sam nij gun anu sar hi II 

Chapter – This chaupai is also in the context of Satsang narration at the beginning of the child scandal. 

Reading – There is doubt in the completion of work. 

5 – Mud Mangalmay Sant Samaju. Jo Jag movable Tirath Raju – 

Chapter – This is the description in the Saint Samaj roop Tirth.

Reading – The question is very good, the work will be completed in a stipulated time period.  

6 – Garal Sudha Su Res Sameera I Gopad Sindhu Anal Sitalai II

Chapter – This chaupai is in the context of the narration of Shri Hanuman ji to enter Lanka. 

Reading -The question is very good, the work will be proved.  

7- Barun Kubera sures Sameera. Run Sanmukh Dhari Kahun Na Dheera 

Chapter – This chaupai is in the context of the narration of mourning of Mandodari after the death of Ravana in the Chaupai Lankand chapter.

Reading – The work will get completed sooner.

8 – Ram Lakhanu Suni Bhai Sukhare ॥

Chapter – This chaupai is with the context of the narration of the blessing of Vishwamitra ji on bringing flowers from the flower garden in the quadruped Balkand. 

Reading – The question is very good. Work will be proved. 

In this way, a total of 4 chaupayas are formed from the question of Ram Shalaka, in which the succession of the questions is contained in all the ways.

Let me know, how did you find this blog on “Shree Ram Charit Manas – Ram Prashnavali”?

Yours Sincerely,

Nirav Hiingu

Shree Ram Charit Manas Ram Shalaka Prashnavali राम चरित मानस – श्री राम शलाका प्रश्नावली 

श्री राम चरित मानस 16 वीं शताब्दी के संत और राम भक्त श्री तुलसीदास जी (1532 – 1623) द्वारा लिखी गई विशिष्ट देवनागरी अवधी भाषा में एक उत्कृष्ट महाकाव्य है। आप श्री तुलसीदास महाराज की छोटी जीवन यात्रा के बारे में देख सकते हैं

Link –  https://youtu.be/-9NQojb4DHc

Kya Hai Shree Ram Charit Manas क्या है श्री राम चरित मानस?

श्री राम चरित मानस, श्री राम भगवान की एक ऐसी झील है जो श्री राम चरित मानस के रूप में खूबसूरती से संग्रहित और संकलित है।

Kya Hai Shree Ram Charit Manas Krut Prashanavali क्या है श्री राम शलाका प्रश्नावली ?

श्री राम शलाका प्रश्नावली राम भक्त या वैष्णव सम्प्रदाय के समूह के बीच असामान्य नहीं है।

वैष्णव भक्तों के मन में श्री रामचरितमानस और राम प्रश्नावली की उपयोगिता और महत्व अत्यधिक है।

इसलिए, इस प्रश्नावली की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के लिए, जो फलनामा की तरह तैयार रेकनर और इंस्टेंट प्रश्न कुंडली की तरह प्रतीत होती है, जिसमें मैंने कई इस्लामिक फालनामा जैसे तम तम फलनामा, रुआम फलनामा, हकीम लुकमानी फलनामा, कुछ ऐसे नाम बताए हैं, जहां आपको कुछ नाम रखने की जरूरत है। अपने जीवन के अनसुलझे सवालों के दिव्य उत्तर प्राप्त करें।

इस्लामिक फालनामा की तरह, हिंदू सनातन धर्म में भारतीय ज्योतिष में हनुमान ज्योतिष,प्रश्न कुंडली जैसे कई रेडी रेकनर शामिल हैं। तो, उन विधियों में से श्री राम शलाका प्रश्नावली को सबसे ऊपर कहा जाता है।

Shree Ram Charit Manas Chart नीचे श्री रामचरितमानस का चार्ट है – राम प्रश्नावली

मान अनुरागी महानुभाव को श्री राम शलाका का प्रश्नावली का विशेष परिचय देने की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती क्योंकि यह महान प्रश्नावली और इसके महत्व और उपयोगिता प्राय सभी रामचरितमानस प्रेमी से परिचित होंगे अतः इसका नीचे नीचे स्वरूप मात्रा अंकित करके उसका प्रश्न का उत्तर निकालने की विधि और उसके प्रश्नों का उल्लेख किया जाता है श्री राम शलाका प्रश्नावली का स्वरूप कुछ इस प्रकार है । 

राम शलाका प्रश्नावली के द्वारा किसी को जब कभी भी अपने प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने की इच्छा हो तो सर्वप्रथम उस व्यक्ति को चाहिए भगवान श्री रामचंद्र जी का ध्यान करें और ध्यान करते हुए मन ही मन उस प्रश्नावली पर मनचाहे कोष्टक में अंगुली या कोई सलाखा रख देनी चाहिए और उस पुस्तक में जो अक्सर हो उसे एक अलग किसी कोरे कागज पर लिख देना चाहिए । 

कोष्टक में जो अक्षर हो उसे अलग किसी कोरे कागज पर या स्लेट के ऊपर लिख दे ।

प्रश्नावली के पोस्टर पर ऐसा कोई निशान लगा देना चाहिए जिससे कि ना तो प्रश्नावली खराब हो ना प्रश्न का उत्तर प्राप्त होने पर उस कोष्टक भूल जाए ।

अब जिस कोष्ठक का अक्षर लिखा गया है उसमें आगे बढ़ना चाहिए तथा उसके नवे कोष्टक में जो अक्सर पड़े उसे भी लिख लेना चाहिए।

इस प्रकार प्रति 9 वे अक्षर के क्रम में लिखते जाना चाहिए और तब तक लिखते जाना चाहिए जब तक उसे उसी पहले कोष्टक के अक्षर का अंगुली पर अथवा शलाका न पहुंच जाए । 

पहले कोष्ठक का अक्षर किस कोष्ठक के अक्षर के नवा कोष्टक में पड़ेगा वहां तक पहुंचते-पहुंचते एक पूरी चौपाई संपन्न हो जाएगी, प्रश्न करता के अब इस प्रश्न का उत्तर होगा यहां तक एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी किसी कोष्टक में केवल आ की मात्रा और किसी की कोष्टक में दो दो अक्षरों का मौजूद होना स्वाभाविक है I 

अतः गिनते समय न तो मात्रा वाले कोष्टक को आपको छोड़ना चाहिए ना दो अक्षर वाले कोष्ठक को दो बार गिरना चाहिए जहां मात्रा का कोष्ठक आवे वह पूर्व लिखित अक्षरों के आगे लिख देनी चाहिए और जहां दो अक्षरों वाले कोष्टक आवे वह दोनों अक्सर एक साथ लिख देना चाहिए । 

अब पूरा उदारण के तौर पर एक व्यक्ति ने रामशलाका प्रश्नावली से किसी प्रश्न के उत्तर में एक चौपाई निकल जाती है पाठक को ध्यान से देखना चाहिए किसी ने भगवान श्री रामचंद्र जी का ध्यान करके अपने प्रश्न का चिंतन करते हुए प्रश्नावली के चिन्ह से संयुक्त “म”अक्षर वाले कोष्टक में अंगुली पहुंच जाती है और वह ऊपर बताए क्रम के अनुसार अक्षरों को गिन गिन कर लिखता जाए तो उस क्रम में उत्तर स्वरूप में चौपाई बन जाएगी । 

चौपाई– हो ई हि सो इ जो रा * र चि रा खा । को क रि त र्क ब ढा वै सा खा ।। 

यह चौपाई बालकांड अंतर्गत शिव और पार्वती के संवाद में आता है। प्रश्न करने के इच्छुक इस उत्तर के रूप में प्राप्त चौपाई से यह आश्रय निकालना चाहिए कि कार्य होने में संदेह है अतः उसे भगवान पर ही छोड़ देना अच्छा रहेगा। 

इस चौपाई के अतिरिक्त श्री राम शलाका प्रश्नावली के 8 और चौपाई बनती है उन सब का स्थान और उनका फल विवरण सहित नीचे दिया गया है कुल 9 चौपाइयां है । 

१ – सुनु सिय सत्य असीस हमारी पूजीहि मन कामना तुम्हारी ।। 

स्थान – या चौपाई बालकांड में सीता जी के गौरी पूजन के प्रसंग में है। गौरी जी ने सीता जी को आशीर्वाद दिया है । 

फल – प्रश्नकर्ता का प्रश्न उत्तम है यह कार्य सिद्ध होगा। 

२ – प्रभिसि नगर कीजे सब काज़ा । ह्दये राखी कोशलपुर राजा ॥

स्थान – यह चौपाई सुंदरकांड में हनुमान जी के लंका में प्रवेश करने का है ।

फल – भगवान का स्मरण करके कार्य का आरम्भ करो – सफलता जरूर मिलेगी ।

३ – उधर हिं अंत ना होई नि बाहु । काल नेमि जिमि रावन राहू॥

स्थान – यह चौपाई बाल काण्ड के आरम्भ में सत्संग वर्णन प्रसंग में है ।

फल – इस कार्य में भलाई नहीं है , कार्य की सफलता में संदेह है ।

४ – बिधि बस सुजन कुसंगत पर हीं । फनि मनि सम निज गुन अनु सर हीं ॥

स्थान – यह चौपाई भी बाल काण्ड के आरम्भ में ही सत्संग वर्णन के प्रसंग की है ।

फल – खोटे मनुष्य का संग छोड़ दो । कार्य पूर्ण होने में संदेह है ।

५ – मुद मंगलमय संत समाजू । जो जग जंगम तीरथ राजू ॥

स्थान – यह चौपाई बालकाण्ड में संत समाज रुपी तीर्थ में वर्णन है ।

फल – यह प्रश्न उत्तम है और कार्य सिद्ध होगा ।

६ – गरल सुधा रिपु करहिं मिताई । गोपद सिंधु अनल सितलाई ॥

स्थान – यह चौपाई श्री हनुमान जी के लंका प्रवेश करने का है ।

फल – प्रश्न बहुत उत्तम है , कार्य सिद्ध होगा ।

७ – बरुन कुबेर सुरेस समीरा । रन सन्मुख धारि काहूँ न धीरा ॥

स्थान – यह चौपाई लंका कांड में रावण की मृत्यु के पश्चात मंदोदरी के विलाप के प्रसंग में है ।

फल – प्रश्न बहुत उत्तम है , कार्य सिद्ध होगा ।

८ – सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे । रामु लखनु सुनि भए सुखारे ॥

स्थान – यह चौपाई बालकाण्ड में पुष्प वाटिका से पुष्प लाने पर विश्वामित्र जी का आशीर्वाद है ।

फल – प्रश्न बहुत उत्तम है । कार्य सिद्ध होगा । 

इस प्रकार राम शलाका प्रश्नावली से कुल ९ चौपाइयां बनती है जिसमे सभी प्रकार से प्रश्नों के उत्तराशय निहित है ।

मुझे बताएं, आपको यह ब्लॉग “श्री राम चरित मानस-रामप्रश्नावली” कैसे लगा ?

आपका हितैषी,

नीरव हिंगु