भगवान् श्रीगणेश कौन हैं? गणेश चतुर्थी पूजा विधि और उनका महत्व
Shri Ganesh Puja : हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत भूमि पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर श्रीगणेश महोत्सव बनाया जायेगा ।
इस पर्व को देखकर आज में एक वीतराग ब्रह्मनिष्ठ संतके सदुपदेश का लेख जो गीता प्रेस गोरखपुर : श्री गणेश अंक – पृष्ठ 68 से संपूर्ण लेख यहाँ उन्ही के सब्दो में उद्धृत कर रहा हु ।
इस महान संत ने इस लेख में सरल विधि बता दी है कि , कैसे एक गरीब इंसान भी श्री गणपति पूजन कर अपनी मनोकामना पूर्ती कर सकता है । और साथ में श्री गणेश जी का महत्व भारतीय परंपरा कब और कैसे हास हुआ – उस पर भी चर्चा की है । आशा है मेरे पाठको को गीता प्रेस का यह लेख पसंद आएगा ।

भगवान् श्रीगणेश कौन हैं? (Koun Hai Bhagwan Shri Ganesh Puja?)
भगवान् श्रीगणेश साधारण देवता नहीं हैं। वे साक्षात् अनन्तकोटि-ब्रह्माण्डनायक जगन्नियन्ता परात्पर ब्रह्म ही हैं।
श्रीगणेशजी तैंतीस करोड़ देवी-देवताओंके भी परमाराध्य हैं। हम भारतीय सनातनधर्मी हिंदुओंके तो वे प्राणाधार ही हैं।
जन्मसे लेकर मरणपर्यन्त हमारा उनसे अखण्ड सम्बन्ध बना रहता है। प्रत्येक कार्य करनेके प्रारम्भमें श्रीगणेशजीका स्मरण करना अत्यावश्यक कर्तव्य माना गया है।
पत्र या बहीखाता या ग्रन्थ लिखते समय सबसे पहले ‘श्रीगणेशाय नमः’ लिखकर तब आगे कुछ और लिखना होता है।
किसी भी देवी- देवताकी पूजा करते समय अथवा यज्ञ करते समय सबसे पहले यदि श्रीगणेश-पूजन नहीं किया गया तो नाना प्रकारकी विघ्न-बाधाएँ आ जाती हैं। दान-पुण्य करिये तो पहले भगवान् गणेशजीको मनाना न भूलिये ।
विवाह – शादी करने, मकान बनवाने, नयी दूकान खोलनेमें सबसे पहले उन्हींकी पूजा होती है। भारतके प्राचीन राजमहल, किले, विशाल देवमन्दिर, अट्टालिका आदिके मुख्य द्वार पर उन्हींकी मूर्ति अवश्य विराजमान मिलेगी।
दीपावलीके दिन तो सभी हिंदू श्रीगणेशजी और श्रीलक्ष्मीजीका पूजन करते हैं। प्रत्येक धार्मिक- सामाजिक कार्यके पहले श्रीगणेश-पूजन एक अनिवार्य कृत्य है।
परमात्मा के विवाहमें भी श्रीगणेश का पूजन (Shri Ganesh Puja)
भगवान् श्रीराघवेन्द्रका जब विवाह हुआ तो उन्होंने स्वयं अपने हाथोंसे श्रीगणेशजीकी बड़े प्रेमसे पूजा की। आशुतोष शंकरजी और पराम्बा पार्वतीने अपने विवाहके समय सबसे पहले उन्हींकी पूजा की।
परब्रह्म परमात्मा श्रीगणेश सभीके पूज्य हैं। उनका स्मरण-पूजन करनेसे समस्त विघ्न-बाधाएँ तत्क्षण दूर हो जाती हैं। वे बड़े ही दयालु और करुणासिन्धु हैं ।
यदि उन्होंने भगवान् श्रीविघ्न विनाशक गणेशकी शरण नहीं ली तो एक न एक दिन उनका अध: पतन होनेमें तनिक भी देर नहीं लगेगी।
जिन योगियों, सिद्धों, वेदान्तियों और ब्रह्मज्ञानियोंने अपने साधनके अभिमानवश विघ्नविनाशक भगवान् श्रीगणेशकी उपेक्षा की और अपने ज्ञान, योग एवं सिद्धि आदिके बलपर ही आगे बढ़नेका प्रयास किया, उनको अपने जीवनमें भीषण विघ्न-बाधाओंका सामना करना पड़ा।
भगवान् श्रीगणेशकी कृपा ही सब प्रकारकी विघ्न-बाधाओंसे बचाकर हमारा लोक-परलोक बना सकती है; इसके अतिरिक्त अन्य कोई साधन नहीं है।

विनयपत्रिका और श्रीगणेश (Vinay Patrika Aur Shri Ganesh Puja)
इसीलिये कलिपावनावतार गोस्वामी श्रीतुलसीदासजीने अपने परम इष्टदेव भगवान् श्रीसीतारामकी प्राप्तिके लिये भगवान् श्रीगणेशकी वन्दना करना परमावश्यक माना था।
उन्होंने विनयपत्रिका के प्रथम पदमें उनकी स्तुति करते हुए कहा है-
‘गाइये गनपति जगबंदन । संकर सुवन भवानी – नंदन ॥’ और अन्तमें उनसे यह वर माँगा – ‘माँगत तुलसिदास कर जोरे । बसहिं राम सिय मानस मोरे ॥’
महाभारत और श्रीगणेश (Mahabharat Aur Shri Ganesh Puja)
भगवान् श्रीगणेशकी हिंदूजातिपर अद्भुत कृपा भगवान् श्रीगणेशने हिंदूजातिके ऊपर असीम कृपा की है और उसका बड़ा उपकार किया है, इसीलिये वह उनकी ऋणी है और उन्हें कभी भुला नहीं सकती।
समस्त विश्व-साहित्यमें ‘महाभारत’ कोई साधारण पुस्तक नहीं, अपितु साक्षात् पंचम वेद है । यह अनन्त विद्याओंका भण्डार है। उसपर आज समस्त विश्व मुग्ध हो रहा है।
नास्तिक रूस भी महाभारतका रूसी भाषामें अनुवाद करा रहा है।
ज्ञानके भण्डार एवं विद्याओंकी खान पंचम वेद महाभारतको यदि भगवान् श्रीगणेश न लिखते तो यह अद्भुत महान् रत्न हिंदूजातिको कैसे प्राप्त हो पाता ?
श्रीवेदव्यासजी बोलते गये और श्रीगणेशजी इसे लिखते गये। तभी उनकी कृपा से यह महान् ग्रन्थरत्न हिंदुओंको प्राप्त हुआ है।

भगवान् श्रीगणेश कैसे प्रसन्न हों? गणेश पूजा की सरल विधि (How to do Simple Shri Ganesh Puja?)
भगवान् श्रीगणेशजीको प्रसन्न करनेका साधन बड़ा ही सरल और सुगम है। उसे प्रत्येक गरीब-अमीर व्यक्ति कर सकता है।
उसमें न विशेष खर्चकी, न विशेष दान-पुण्यकी, न विशेष योग्यताकी और न विशेष समयकी ही आवश्यकता है। पीली मिट्टीकी डली ले लो।
उस पर लाल कलावा (मोली) लपेट दो । भगवान् श्रीगणेश साकार रूपमें उपस्थित हो गये । रोलीका छींटा लगा दो और चावलके दाने डाल दो ।
पूजनकी यही सरल विधि है । गुड़की डली या चार बताशा चढ़ा दो, यह भोग लग गया और
“गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बूफल चारु भक्षणम् । उमासुतं शोक विनाश कारकं नमामि विघ्नेश्वर पाद पङ्कजम्॥”
यह छोटा-सा श्लोक बोल दो, मन्त्र हो गया। बस, इतनेमात्रसे ही वे तुमसे प्रसन्ने हो गये। कैसे दयालु हैं वे ?
कुछ भी न बने तो दूब ही चढ़ा दो और अपने सारे कार्य सिद्ध कर लो। खर्च कुछ भी नहीं और काम सबसे ज्यादा; यही तो उनकी विलक्षण महिमा है ।
भारतके घोर अधःपतनका कारण: भगवान् श्रीगणेशकी उपेक्षा
भारतके घोर अधःपतनका कारण भगवान् श्रीगणेशकी उपेक्षा भारतके घोर अध: पतनका एकमात्र कारण भगवान् श्रीविघ्नविनाशक गणेशजीकी घोर उपेक्षा है।
पहले धर्मप्राण भारतके प्रत्येक विद्यालयमें बालकोंसे सर्वप्रथम तख्तीपर ‘श्रीगणेशाय नमः’ लिखवाकर और भगवान् श्रीगणेशका पूजन करवाकर अध्यापक पढ़ाना प्रारम्भ करता था ।
प्रतिवर्ष सारे विद्यालयोंमें भाद्रपद श्रीगणेश- चतुर्थी (डंडा चौथ) – को उनका बड़ी धूम-धामके साथ पूजन कराया जाता था, जो बस, देखते ही बनता था ।
समस्त भारत श्रीगणेश-भक्तिके रंगमें रँग जाता था और बच्चा-बच्चा उनके प्रेममें विभोर हो जाता था। आज उसी धर्मप्राण भारतके सभी विद्यालयोंमें भगवान् श्रीगणेशका पूजन करना तो दूर रहा, उनका नाम भी नहीं लिया जाता।
जब तक विद्यार्थी भगवान् श्रीगणेश और माता श्रीसरस्वतीका स्मरण-पूजन करते रहे, तबतक बालकोंकी बुद्धि शुद्ध और निर्मल रही।
पर जब से विद्यार्थियोंसे भगवान् श्रीगणेशका पूजन करना छुड़ाया गया, पूजनादिको पाखण्डवाद बताया गया, तबसे इन पढ़नेवाले विद्यार्थियोंकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी, जिसका घोर भयंकर दुष्परिणाम अनैतिकता,अनुशासनहीनता आदिके रूपमें प्रत्यक्ष देखनेमें आ रहा है ।
जो पतन यवन- शासनकालमें अथवा अंग्रेज- शासनकालमें नहीं हुआ, वह हो गया। बालकोंको अक्षर-ज्ञान कराते समय आजकल ‘ग’ माने ‘गणेश’ न पढ़ाकर, ‘गदहा’ पढ़ाया जाता है।

श्रीगणेश-भक्तोंका परम कर्तव्य: गणेश उपासना के नियम (Rules for Shri Ganesh Puja)
भगवान् श्रीगणेशके भक्तोंको निम्नलिखित बातोंपर अवश्य ध्यान देना चाहिये।
१-भगवान् श्रीगणेशका नित्यप्रति पूजन करो और प्रातःकाल उठकर सर्वप्रथम उनके चित्रका दर्शन करो। २- किसी कार्यके आरम्भके पूर्व श्रीगणेशका स्मरण करना कदापि न भूलो।
३-अपना घर, मकान, महल बनाते समय द्वारपर आलेमें भगवान् श्रीगणेशजीकी सुन्दर प्रतिमा लगाना न भूलो, जिससे तुम्हें हर समय दर्शन- स्मरण करनेका सौभाग्य प्राप्त होता रहे।
४-समाजके लिये हानिकारक तामसिक वस्तुओं (जैसे- बीड़ी या मदिरा) – को बेचनेके लिये उनपर अथवा जूते- ते-चप्पलपर गणेशजीका मार्का मत लगाओ। ५-भगवान् श्रीगणेशको प्रसन्न करनेके लिये स्वयं भी सात्त्विक बनो । तामसिक पदार्थों का सेवन मत करो।
६- पीली मिट्टीकी गणेशप्रतिमा बनाकर उनका पूजन करनेके पश्चात् उन्हें ठीकसे किसी पवित्र स्थानपर रख दो और बादमें श्रीगंगा-यमुना आदि पवित्र नदियोंमें ले जाकर प्रवाहित कर दो। वह पैरोंमें न आने पाये, इस बातका पूरा-पूरा ध्यान रखो।
७- पूज्य ब्राह्मणोंके द्वारा श्रीकी कथाका श्रवण करो । गणेशमन्दिर में जाकर श्रीगणेश का दर्शन- पूजन करो। उनके मन्त्रका जप करो और उनके नामका संकीर्तन करो। वर्णाश्रमधर्मके अनुसार चलो और पापोंसे बचो।
इसीसे तुमपर भगवान् श्रीगणेशजी प्रसन्न होंगे और तुम्हारी सब विघ्न-बाधाओंको दूर कर तुम्हारा परम कल्याण करेंगे।
प्रेषक – भक्त
श्रीरामशरणदासजी
गीता प्रेस गोरखपुर


