Diwali Pooja Vidhi : Diwali or Divali is the most important festival of India in Sanatan Dharma. Hindus wait for this festival of light to celebrate day to – the Goddess of Wealth -”Mahalaxmi ”.

People in India celebrate Divali or Diwali Puja in different states as per their desire and capacity. 

Today i am disclosing extremely secretive Diwali Pooja Vidhi on eve of Diwali 2020.

Laxmi Pooja Vidhi in Diwali 2020

Dakshinavarti Shankh and Diwali Pooja Vidhi

Dakshinavarti Shankh is a Shell Conch which is said to be very auspicious and pious in hindu sanatan dharma ritual, hence it is used in Hindu Sanatan Dharma in Laxmi Puja specially on Diwali.

But among all types of Shankh – only Dakshinavarti is said to be best shell conch and it is complete manifestation of Maa Laxmi ji hence for diwali pooja vidhi, one need only Dakshinavarti Shankh to please Mahalaxmi Mata. 

Diwali Pooja Vidhi with Dakshinvarti Shankh Prayog 

Procedure –

  • One should take bath on the Diwali night and wear new clothes preferably yellow colour clothes.
  • Girls and women should wear yellow saree and Mens should wear yellow dhoti with kurta.
  • Sit on the asana or mat facing East/North Direction.
  • Take a wooden plank in front and keep white colour cloth.( new )
  • Place Goddess Mahalaxmi Idol or Picture.
  • Perform Panchopchaar Pooja which includes devotion with Kukum,Rice,Dhoop,Deep and Naivaidya.
  • Panchoupachar Poojan consists of – Ganda ( Kumkum/saffron), Aksath ( Rice – ideally take Basmati Rice ) because aksath means without any breakage – hence one should take those rice which is not broken into 2 parts.
  • Pushpa means flowers ( here in Saraswati Pooja take white flowers), Dhoop ( Scent Agarbatti), Deep ( light cow ghee ) and Naivediya ( Prasadam ) here offer white milk prasadam or yellow coloured sweet to Goddess Mahalaxmi.
  • Now take Sankalp either in Sanskrit or any language.
  • Sankalp is a mutual agreement between the deity and the worshipper just like we make the business deal and written documentation when we deal with 2 people similarly Sankalp is done in ritual wherein we bind the deity to offer his/her blessing by doing their Mantra Chanting/Stotram.
  • Now chant – Ganesh Mantra – Om Gam Ganapatye Namah – One Mala wherein 1 mala 108 times.
  • Now chant – Guru Or Shiva Mantra – Om Guruve Namah OR GUM – One Mala.
  • Now chant – Mahalaxmi Mantra –

    Om Hreem Shreem Kleem Shreedhar Kar-Sthaay Payonidhi Jaataay Shree Dakshinaavart Shankhay Hreem Shreem Kleem Shree Karaay Pujyaay Namah” – 11 Mala.
  • After the 11 Mala Chanting, perform Havan 108 times with Swaha adding to the above mentioned Laxmi mantra with Cow Ghee.
  • After the diwali pooja vidhi and chanting of the mantra, offer Namaskar Mudra to Deity.
  • Also, take the blessing of your elders – Parents and Grandparent by touching their feet.
  • It is necessary to offer meals to children ( below 12 year ).

Dakshinavarti Shankh Puja – Diwali Pooja Vidhi

As per the ancient mantra text, if possible sadhak/devotee should place vessel of silver ( silver bowl ) , now asana of red colour and now placed Dakshinavarti Shankh on red asana and offer prayer to this newly energise shankh with panchopchar pooja.

In absence of a silver vessel or bowl,one can take Kaasthasan or Copper Vessel, place red colour asana on the vessel and insert a small piece of silver in the vessel.

Daily after performing diwali pooja vidhi , one should take care that the backside of shankh is kept on downside and the vacuum region should be exposed to upside. The mouth of the shankh should be in the direction of Devotee and tail should be in opp direction.

Kamya Prayog of Dakshinavarti Shankh and Diwali Pooja Vidhi – काम्य प्रयोग और दक्षिणावर्ती शंख

Devotees should fill the water in shankh and sprinkle the water on walls of the house or office premises to make a positive vibration in the atmosphere.

If anyone has Laxmi Murti then fill the shankh with cow milk and do abhishek with cow milk. By doing such an offering it is said that a person gets blessed with health, wealth and prosperity.

Similarly, anyone does abhishek with water on Laxmi Murti blessed with intelligence, wisdom and knowledge.

Note – During the whole Dakshinavarti Shankh – Diwali Puja Vidhi and In laxmi abhishek, devotees may recite Laxmi Mantra given below.

Mantra – “Shree Laxmi Laxmi-Narayanaya Namah”.

Let me know , how did you find this article on “Diwali Pooja Vidhi and Dakshinavarti Shankh”

Regards,

Digital Numerologist & Graphologist,

Nirav Hiingu

Diwali Laxmi Pooja

दक्षिणावर्ती शंख और दिवाली पूजा विधान -Diwali Pooja Vidhi

भारत में सनातन धर्म में दिवाली या दीपावली सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। हिन्दू परिवार इस त्यौहार के लिए इंतजार करते हैं – दिवाली को मनाने के लिए – धन की देवी – “महालक्ष्मी” पूजन करते है।

लोग अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार अलग-अलग राज्य में दिवाली या दिवाली पूजा मनाते रहते हैं। आज मैं दिवाली 2020 की पवित्र दिवस पर अत्यंत गोपनीय महालक्ष्मी पूजन विधि का खुलासा कर रहा हूं।

दक्षिणावर्ती शंख एक महत्त्वपूर्ण शंख है जिसे हिन्दू सनातन धर्म अनुष्ठान में बहुत शुभ और पवित्र कहा जाता है, इसलिए इसका उपयोग हिंदू सनातन धर्म में लक्ष्मी पूजा में विशेष रूप से दिवाली पर किया जाता है।

हिन्दू धर्म ग्रंथो में कई शंख का उल्लेख पाया जाता है लेकिन शंख के कई प्रकारों में – केवल दक्षिणावर्ती को ही माँ लक्ष्मी जी का सबसे अच्छा और पूर्ण स्वरूप कहा जाता है, इसलिए दिवाली पूजा के लिए, महालक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए केवल दक्षिणावर्ती शंख की आवश्यकता होती है।

दिवाली पूजा विधान – Diwali Pooja Vidhi

१) दीवाली की रात को स्नान करना चाहिए और नए कपड़ों को या हो सके तो पीले रंग के कपड़े पहनना चाहिए।

२) लड़कियों और महिलाओं को पीले रंग की साड़ी और पुरुषों को चाहिए – कुर्ते के साथ पीली धोती पहननी चाहिए।

३) आसन या चटाई पर पूर्व / उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

४) सामने एक लकड़ी का तख्ता लें और सफेद रंग का कपड़ा रखें। (नया आसन )

५) देवी महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र लगाएं।

६) पंचोपचार पूजा करें जिसमें कुकुम, चावल, धुप, दीप और नैवैद्य के साथ भक्ति शामिल है।

७) पंचोपचार पूजन में शामिल हैं – गंडा (कुमकुम / केसर), अक्षत (चावल – आदर्श रूप से बासमती चावल) क्योंकि अक्षत का अर्थ है बिना किसी टूट-फूट के – इसलिए उन चावलों को लेना चाहिए जो 2 भागों में टूटे नहीं हैं। 

८) पुष्पा का अर्थ है फूल (यहां सरस्वती पूजा में सफेद फूल लेते हैं), धोप (सुगंध अगरबत्ती), दीप (गाय का घी) और नैवेद्य (प्रसादम) यहां देवी सरस्वती को सफेद दूध का प्रसाद चढ़ाते हैं।

९) अब संकल्प करे – यह संकल्प हो सके तो संस्कृत में लें या किसी भी भाषा में संकल्प करे 

१०) यह संकल्प “देवता और उपासक” के बीच एक आपसी समझौता है, जैसे हम व्यापार का सौदा करते हैं और लिखित दस्तावेज बनाते हैं जब हम 2 लोगों के साथ सौदा करते हैं तो इसी तरह से संकल्प अनुष्ठान में किया जाता है जिसमें हम देवता को उनके मंत्र का जाप करने के लिए आशीर्वाद देते हैं। 

११) अब गणेश मंत्र करे  – “ओम गम गणपतये नम” – एक माला करे 

१२) अब गुरु या शिव मंत्र – “ओम गुरुवे नमः या गम “– एक माला करे 

१३) अब जप ११ माला करें – महालक्ष्मी मंत्र – “ओम ह्रीं श्रीं क्लीम श्रीधर करस्थाय पयोनिधि जताय श्री दक्षिणावर्त शंखाय ह्रीं श्रीं क्लीम श्री कराय पूजये नम:।”

१४) 11 माला जप के बाद, स्वाहा सब्द के साथ – उपरोक्त मंत्र का 108 बार गाय के घी के साथ हवन करें।

१५) मंत्र की पूजा और जाप के बाद, देवता को नमस्कार मुद्रा अर्पित करें

१६) साथ ही, अपने पैर छूकर अपने बुजुर्गों – माता-पिता और दादा-दादी का आशीर्वाद लें।

१७) बच्चों को भोजन (12 वर्ष से कम) कराना आवश्यक है।

प्राचीन मंत्र शास्त्र के अनुसार, यदि संभव हो तो साधक / भक्त को लाल रंग के आसन, चांदी के बर्तन रखे और अब इस लाल रंग के आसन पर दक्षिणावर्ती शंख रखना चाहिए और पंचोपचार पूजा के साथ इस नव ऊर्जित शंख की पूजा करनी चाहिए।

चांदी के बर्तन या कटोरे के अभाव में, कोई भी धातु का बर्तन /पात्र या काष्टासन या तांबे का बर्तन ले सकता है ।

बर्तन पर लाल रंग का आसन रखें और बर्तन में चांदी का एक छोटा टुकड़ा डालें।

पूजा करने के बाद दैनिक साधना में एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि शंख के पास एक चांदी का टुकड़ा रखे ( अगर चांदी का पत्र न मिले तब ) ।

भक्तों को चाहिए की इस शंख में जल भरके रखना चाहिए और वातावरण में सकारात्मक कंपन बनाने के लिए घर या कार्यालय परिसर की दीवारों पर पानी छिड़कना चाहिए।

यदि किसी के पास लक्ष्मी मूर्ति है तो शंख को गाय के दूध को इस शंख से भर दें और गाय के दूध से अभिषेक करें। ऐसा प्रसाद चढ़ाने से कहा जाता है कि व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

इसी तरह, कोई भी व्यक्ति बुद्धि, ज्ञान और ज्ञान प्राप्ति के लिए और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु ,पानी के साथ लक्ष्मी माँ की मूर्ति पर जल अभिषेक करे ।

नोट – संपूर्ण दक्षिणावर्ती शंख – दीवाली पूजा विधान और लक्ष्मी अभिषेक के दौरान, भक्त नीचे दिए गए लक्ष्मी मंत्र का पाठ कर सकते हैं।

मंत्र – ” श्री लक्ष्मी लक्ष्मी-नारायणाय नमः”।

आशा रखता हु – दीवाली के इस पवित्र पर्व पर – इस महालक्मी पूजन से आपको लाभ होगा ।

आपके और पूरे परिवार को दिवाली २०२० की शुभ कामनाये ।

आपका शुभ चिंतक ,

नीरव हींगु 

अंक ज्योतिषी – हस्ताक्षर तज्ञ