Sankat Mochan Hanuman Ashtak:
संकटमोचन हनुमान अष्टक : “बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोग भयो अंधियारो” का गान करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।
हनुमान चालीसा के साथ इसका नियमित पाठ करने से भय और मंगल दोष का पूर्णतः निवारण होता है।
यदि प्रतिदिन हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक का पाठ करना संभव न हो, तो प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान अष्टक का पाठ अवश्य करना चाहिए।
Sankat Mochan Hanuman Ashtak
बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो
देवन आनि करी बिनती तब छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 1 II
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो
चौंकि महामुनि साप दियो तब चाहिए कौन बिचार बिचारो
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 2 II
अंगद के संग लेन गए सिय खोज कपीस यह बैन उचारो
जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब लाए सिया-सुधि प्राण उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 3 II
रावण त्रास दई सिय को सब राक्षसी सों कही सोक निवारो
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाए महा रजनीचर मरो
चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 4 II
बान लाग्यो उर लछिमन के तब प्राण तजे सूत रावन मारो
लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो
आनि सजीवन हाथ दिए तब लछिमन के तुम प्रान उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 5 II
रावन जुध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो
आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 6 II
बंधू समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो
जाये सहाए भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत संहारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 7 II
काज किये बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसे नहिं जात है टारो
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होए हमारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो II 8 II
।। दोहा। ।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।
श्रीराम, जय राम जय जय राम II

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Sankat Mochan Hanuman Ashtak का पाठ कब करे ?
संकटमोचन हनुमान अष्टक पाठ का विधान मंगलवार अथवा शनिवार, प्रभात अथवा संध्या वेला में करना शुभ है। घोर विपदा, डर, रोग या ग्रह पीड़ा निवारण हेतु निरंतर इक्कीस दिवस तक श्रद्धापूर्वक पठन करना महा फलदायी है ।

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Sankat Mochan Hanuman Ashtak पाठ के लाभ:
ऐसी महा मान्यता है कि इस दिव्य अष्टक का श्रद्धापूर्वक पठन करने से पवनपुत्र हनुमान अपने भक्तों के समस्त दैहिक, मानसिक एवं आर्थिक कष्टों का समूल निवारण कर देते हैं।
हनुमान चालीसा के मंगलमय समापन के पश्चात इस दिव्य अष्टक का पठन करना शास्त्रानुसार अत्यंत कल्याणकारी एवं विशेष महा फलदायी सिद्ध होता है।

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Sankat Mochan Hanuman Ashtak का पाठ करने के मुख्य नियम और समय:
मंगल-शनि वार एवं समय का चयन: हनुमान जी की उपासना हेतु मंगल-शनि वार विशेष रूप से समर्पित हैं। इन दिवसों पर प्रभात अथवा संध्या वेला में पाठ का विधान करना अत्यंत शुभ तथा महा फलदायी सिद्ध होता है।
घोर संकट एवं विपदा काल: यदि आप किसी अत्यंत विकट परिस्थिति अथवा भय से ग्रस्त हैं, तो श्रद्धापूर्वक नित्य सात बार इस अष्टक का पठन करना शीघ्र फलदायी एवं मंगलकारी सिद्ध होता है।
पठन एवं पूजन की विधि: नित्य क्रिया से निवृत्त होकर पवित्र वस्त्र धारण करें। पवनपुत्र श्री हनुमान जी के विग्रह के समक्ष शुद्ध घी का दीप प्रज्वलित कर पूर्ण भक्ति भाव से पाठ संपन्न करें।
ब्रह्मचर्य व्रत : हनुमान उपासना में मुख्य नियम है शुद्धता और ब्रह्मचर्य , इसीलिए साधक को चाहिए ( चाहे वह विरक्त अथवा गृहस्थ व्यक्ति हो उसे चाहिए ) कि वह मन, वचन और शरीर से जब तक अनुष्ठान-उपासना चल रही हो तब तक पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करे ।

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साधना अवधि :
साधक को Sankat Mochan Hanuman Ashtak का पथ नित्य संध्या काल में गणेश और गुरु मंत्र की १-१ माला करके 108 बार अथवा 1008 बार राम नाम का जाप करे ।
इसके पश्चांत देसी गाय का घी जलाकर , लाल आसन पर बैठकर Sankat Mochan Hanuman Ashtak का 21 बार पथ सस्वर पाठ करे ।
यह साधना 21 दिन तक जारी रखे , आपकी मनोकामना या संकट अवश्य ही दूर होगा । अधिक लाभ के लिए साधक को 41 दिन तक उपासना करनी चाहिए ।
आशा रखता हु , मेरी इस छोटे से प्रयाश से राम और हनुमान जी के भक्तो को अवश्य ही लाभ होगा, अंत : मैं अपनी कलम को पूर्णविराम देता हु । जय श्री राम ।
श्री हनुमान दर्शन अभिलाषी ,
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